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union Bank  स्वयं सहायता समूह

विशेषताएं

स्वयं सहायता समूह (SHG)क्या है ?
स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), आपस में अपनापन रखने वाले  एक जैसे सूक्ष्म उद्यमियों का ऐसा समूह है जो अपनी आय से सुविधाजनक तरीके से बचत करने और उसको समूह के सम्मिलित फंड में शामिल करने और उसे समूह के सदस्यों को उनकी उत्पादक और उपभोग जरूरतों के लिये  समूह द्वारा तय ब्याज, अवधि और अन्य शर्तों पर दिये जाने के लिये आपस में सहमत होते हैं.  
उद्देश्य :
  • औपचारिक प्रणाली की तकनीकि और प्रशासनिक क्षमता और वित्तीय संसाधनों के साथ  अनौपचारिक ऋण प्रणाली के अनुरूप लचीली, संवेदी और समयानुकूल निर्धनों की क्रेडिट आवश्यकतों को पूरा करना.
  • बैंकरों और ग्रामीण जनता के बीच आपसी विश्वास का वातावरण बनाना.  
  • वित्तीय संस्थाएं समाज के जिन वर्गों तक नहीं पहुंच पाती हैं समाज के उन वर्गों में बचत की आदत और ऋण की सुविधा के प्रयोग को प्रोत्साहित करना.
पात्रता :
समूह को
  • कम से कम छह माह से सक्रिय होना चाहिये.
  • अपने संसाधनों से बचत की हो और ऋण  दिया हो.
  • समुचित खाते रिकार्ड रखे हों.
  • लोकतांत्रिक तरीके से काम होना व होते दीखना चाहिये जहां सभी सद्यों की सुनी जाती हो.
  • एक दूसरे की सहायता करने और मिलकर काम करने के लिये बनाया गया होना चाहिये और शाखा परबंधक इस बात से संतुष्ट होने चाहिये कि समूह का गठन केवल प्रोजेक्ट में भाग लेने और उसके लाभ प्राप्त करने के लिये ही नहीं बनाया गया है.
  • सदस्यों की पृष्ठभूमि और हित एक समान होने चाहिये.
लिंक कार्यक्रम :
बैंक वित्त उपलब्ध कराने के दो तरीके  हैं.
  • सीधे स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), या
  • समूह को ऋण देने के लिये वीए/गैर सरकारी संगठनों को अधिक मात्रा में ऋण देकर
ऋण की मात्रा :
बैंक द्वारा स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के आकलन के अनुसार बचत और ऋण का स्वीकार्य अनुपात 1:1 से 1:4 तक हो  सकता है.
ब्याज दर और प्रोसेसिंग प्रभार :
नवीनतम ब्याज दर की जानकारी के लिये यहां क्लिक करें.
नवीनतम प्रोसेसिंग प्रभार की जानकारी के लिये यहां क्लिक करें.
प्रतिभूति :
बैंक के धन से सृजित आस्ति का दृष्टिबंधन.
संपार्श्विक प्रतिभित के लिये कोई आग्रह नहीं.
प्रतिभूति दस्तावेज :
  • सभी सदस्यों द्वारा सम्मिलित करार.
  • सदस्यों द्वारा प्राधिकृत करार
अदायगी :
बैंक समूह से वार्ता करके अदायगी अवधि तय करेगा जो 3 से 7 साल तक की हो सकती है. .
अदायगी सामान्यत: मासिक किस्तों में की जायगी या स्थानीय परिस्थितयों तथा सदस्यों द्वारा किये जाने वाले कार्य आदि के अनुरूप होगी. .
सदस्यों द्वारा समूह को ऋण की दायगी प्रतिदिन, प्रति सप्ताह या हाट के दिन या प्रति पखवारा, माह हो सकती है.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


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