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विशेषताएं

यूनियन आदर्श ग्राम (यूएजी)
यूएजी अंतर्गत बैंक ने देश भर के 101 गांवों को गोद लिया है. वीकेसी के अधिकारियों ने शाखा प्रबंधक और क्षेत्रीय प्रबंधक से परामर्श कर अपने अधिकार क्षेत्र के एक पिछड़े गांव की पहचान की है और बैंकिंग के अलावा, ग्रामीण मूलभूत संरचना निर्माण, निवेश और उपयोग आवश्यकता की बुनियादी जरूरतों और गांव के लिए एक ऋण सह विकास योजना तैयार की है. उन्होंने उन तत्काल आवश्यकताओं की पहचान भी की है जिसे सरकारी एजेंसी के साथ मिलकर तुरंत पूरा किया जाना है जहाँ बैंक आवश्यकता को शीघ्र पूर्ण करने में उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेगा और यदि आवश्यकता होती है तो इस योजना के लिए आवश्यक राशि की कमी की भरपाई बैंक कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व कोष और ग्रामीण प्रचार कोष के माध्यम से करेगा.
 

इस योजना के अंतर्गत प्रति यूएजी 'एक बालिका को गोद लेना’ एक प्रमुख परियोजना है. छठी कक्षा से बारहवीं कक्षा तक अध्ययन से संबंधित सभी व्ययों के लिए इन बालिकाओं को बैंक द्वारा गोद लिया जाता है.

 
विकास के संबंध में कुछ यूएजी में हुए उल्लेखनीय प्रदर्शन को निम्नलिखित केस-स्टडी द्वारा पढ़ा जा सकता है-
  • नागेपुर यूएजी, आर.ओ.वाराणसी
  • के.जी. पालायम, आर.ओ- कोयंबटूर
  • ओशबली, आर.ओ.दुर्गापुर
 
यूनियन आदर्श ग्राम-नागेपुर, शाखा-राजातलाब क्षेत्र-वाराणसी की केस-स्टडी
उत्तर प्रदेश के वाराणसी क्षेत्र में स्थित नागेपुर एक छोटा सा गांव है और उत्तर प्रदेश के अन्य गांवों की तरह यह भी कई आर्थिक और सामाजिक समस्याओं से ग्रस्त था और इस बात का इंतजार कर रहा था कि विकास की कोई किरण इस गांव पर पड़े जो इस गांव को गरीबी, अशिक्षा, आय में असमानता और अन्य कई मुद्दों के चुंगल से बाहर निकलने में सहायता कर सके.

2008 में, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने गांव के हालात को बदलने का निर्णय लिया और पिछड़े गांव के विकास के लिए पैन इंडिया कार्यक्रम जो यूनियन आदर्श ग्राम योजना के नाम से जाना जाता है के अंतर्गत गांव के विकास में लगे. उस दिन के बाद से आज तक गांव ने विकास की दिशा में कुछ बड़े कदम उठाए जिनका विश्लेषण हम इस केस-स्टडी में करेंगे.

गांव के बारे में-वाराणसी क्षेत्र के अराजी ब्लॉक में यह एक छोटा सा गांव है. इस गांव की जनसंख्या 3000 है, जिसमें 400 परिवार हैं जिसमें से 55 परिवार समाज के अल्पसंख्यक वर्ग के है और बाकी परिवार पिछड़े वर्ग के हैं. सीमांत और मध्यम पैमाने के किसानों के रूप में कुछ किसान जो कृषि क्षेत्र में शामिल है, उनके अलावा ज्यादातर अर्थात करीब 80% परिवार डिजाइन बनाकर और वाराणसी साड़ियों पर हाथ से काम करके अपना पालन-पोषण करते हैं.

गांव में शिक्षा की स्थिति बहुत ही उाऎमजोर है, लगभग एक दर्जन छात्र ही औपचारिक शिक्षा के लिए स्कूल जाते हैं और लड़की की शिक्षा सिर्फ अक्षरों के ज्ञान तक ही सीमीत है वह भी सिर्फ इसलिए कि उनकी शादी की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके. लड़के और लड़कीयों की छोटी उम्र में ही शादी कर दी जाती है जिसके कारण उन्हें एक स्वतंत्र व्यक्त्वि के रुप में विकसित होने का मौका नहीं मिलता है. 3000 में से केवल 3 व्यक्ति ही सरकारी कार्यालयों मे कार्य कर रहे हैं जबकि कोई भी महिलाएं आत्म- निर्भर नहीं है क्योंकि सभी सिर्फ घर गृहस्थी के काम में लगी हुईं हैं.

किए गए विकासपूर्ण कार्य:-
1) ग्रामीणों को बैंकिंग में अभ्यस्त करना- गांव के लोग बैंकिंग में लगभग न के बराबर अभ्यस्त थे और ग्रामीण अपनी सभी वित्तीय जरूरतों के लिए महाजन/साहूकारों के चुंगल में फसते जाते थे. शाखा के कर्मचारीयों द्वारा बैंक खाता होने के लाभों के बारे में ग्रामीणों को निरंतर प्रेरित और जानकारी देने के बाद, अब 380 परिवारों का हमारी बैंक शाखा में नो-फ्रिल खाता है.
2) किसान/ग्रीन क्रेडिट कार्ड का संवितरण - किसानों को खेती करने के लिए पानी और उर्वरक की उचित मात्रा की आवश्यकता होती है जिसके लिए उन्हें वित्तीय सहायता की जरूरत होती है. इसके लिए उन्हें महाजन/साहूकारों पर निर्भर रहना पड़ता है जो फसल उगाने पर लगाए गए प्रयासों के बाद भी वास्तविक लाभ न होने पर भी किसानों पर ऊंची ब्याज दर लगाते हैं. बैंक पहले से ही ग्रीन क्रेडिट कार्ड के माध्यम से इन किसानों को ऋण के लिए जरूरी राशि संवितरित कर चुका है जबकि 31 किसानों को कम समय अवधि में कार्ड प्राप्त हो जाएंगे.
3) मजदूरों को आत्म-निर्भर बनाने के लिए ऋण- मजदूर बड़े व्यापारियों के लिए बहुत कम कीमत पर काम करते थे. अब जबकि शाखा ने 16 परिवारों को छोटे ऋण पैकेज दिए हैं जिनकी सहायता से वह स्वयं छोटे करघे चला रहे हैं और बंधुआ मजदूरों के रुप में कार्य करने से अधिक कमा रहे हैं.
4) सरकार की डीआरआई योजना के तहत छोटी दुकानों के लिए ऋण: सरकारी योजना के तहत शाखा ने 5 बहुत गरीब लोगों को चाय की दुकान, साइकिल मरम्मत की दुकान खोलने के लिए छोटे ऋण वितरित किए हैं जिसकी सहायता से अब वे अपने परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा कर पा रहे हैं.
5) महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने के लिए ऋण- गांव की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए शाखा ने मीरा स्वयंसेवी समूह का गठन किया है जिसके प्रथम चरण में महिलाओं को आपस में वित्तीय लेनदेन करने को प्रोत्साहित किया गया जिससे कि वे वित्तीय लेनदेन की गतिविधियों को समझ सकें और दूसरे चरण में बैंक द्वारा उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान की गई जिससे कि वे छोटी दुकानों जैसे कि सब्जी विक्रेता और पशु पालन का काम कर सकें और अपने परिवार के लिए धन अर्जित कर सकें और सहायता प्रदान कर सकें. इस सफलता के आधार पर बहुत से स्वयंसेवी सहायता समूह बनाये गये है जिससे कि महिलाएं पुरुषों के बराबर आ सकें और आत्मनिर्भर बन सकें.
6) किसान क्लब और ज्ञान प्रसार- बैंक ने एक किसान क्लब का भी गठन किया है जिसके द्वारा गांव के किसानों को खेती के नई प्रथाओं और खेती के तरीके और तकनीक में हो रहे विकास के बारे में जानकारी ?? जाएगी जिससे कि उनकी फसल उत्पादकता को बढ़ाया जा सके. विभिन्न सरकारी योजनाओं और उपलब्ध रोजगार और उद्यमशीलता के अवसरों के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए शाखा के अधिकारी अक्सर गांव में जाते हैं.
7) स्थानीय संस्कृति और त्यौहारों का प्रसार -शाखा प्रत्येक वर्ष स्थानीय कार्यक्रमों जैसे कि कजोली उत्सव का आयोजन करती है और उसके लिए पैसे की व्यवस्था करती है जिसमें लगभग आसपास के बीस गांव भी हिस्सा लेते हैं और भाग लेने वाली सभी टीमों को पुरस्कार दिए जाते हैं.
8) स्कूल के बच्चों और अन्य ग्रामीणों के लिए वॉटर कूलर- बैंक शाखा ने स्कूल जाने वाले सभी बच्चों और अन्य कई ग्रामीणों को स्वच्छ और ठंडा जल प्रदान करने के लिए वॉटर कूलर प्रदान किया है.
9) सामाजिक कार्य के लिए बैंक के कर्मचारीयों का योगदान- हमारे बैंक के कर्मचारी अनेक सामूदायिक विवाहों जो गांव में प्रतिवर्ष होते हैं उनमें व्यक्तिगत रुप से आर्थिक योगदान देते हैं.
 
निष्कर्ष- बैंक शाखा और ग्राम पंचायत ने यह निर्णय लिया हैं कि सुधार के यह सारे कार्य जो आज तक हुए हैं वे बस एक छोटी सी शुरुआत है और यह प्रोत्साहित करने वाले प्रारंभिक चरणों के रुप में कार्य करेंगे जो भविष्य में विकास कार्य की गति को कायम रखने के लिए आवश्यक हैं जिससे कि इस गांव को अन्य सभी 101 यूनियन आदर्श ग्राम के लिए एक मॉडल बनाया जा सके. भविष्य की योजनाओं में, आसान पहुंच के लिए सड़कों का निर्माण, बिजली की निरंतर आपूर्ति के लिए सौर उर्जा, पीने योग्य पानी की निरंतर आपूर्ति, बेहतर स्वच्छता के लिए समूदायिक शौचालय, ग्राम पंचायत बैठक के लिए स्थायी स्थान, सभी ग्रामीणों के पास उचित आय और जीवन शैली और सभी के लिए शिक्षा शामिल है.
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा किए गए विकास कार्य से गांव के लोग इतने प्रभावित हुए कि उन्होनें गांव के प्रवेश द्वार पर एक स्वागत बोर्ड लगा दिया जिस पर लिखा है -
यूनियन आदर्श ग्राम- नागेपुर, आपका स्वागत करता है.
 
यूनियन आदर्श ग्राम, के.जी पलायम में की गईं विकासपूर्ण् गतिविधियों पर केस-स्टडी
 
के.जी.पलायम भारत के उन लाखों गांव में से एक है जो गरीबी, अस्वस्थ्य जीवन दशा और संबंधित सामाजिक समस्याओं जैसी बीमारी से पीड़ित था जब तक कि उसे यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा यूनियन आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद नहीं लिया गया.
 
गांव के बारे में - हमारे बैंक के, कोम्बटूर क्षेत्र में स्थित एक छोटा सा गांव जिसकी जनसंख्या 2001 जनगणना के अनुसार लगभग 2770 है. गांव के लोगों के जीवन यापन का मुख्य साधन कार्य कृषि है. अन्य परंपरागत फसलें जिनकी यहाँ पैदावार की जाती है उनके अलावा यहाँ पैदा होने वाले नारियल की गुणवत्ता उच्च होती है और उसकी उपज इस क्षेत्र में सबसे अधिक है.
 
किए गए विकासात्मक कार्य -

क) किसान क्लब का गठन- यह प्रथम चरण है जिसका प्रारंभ बैंक द्वारा शुरुआती तौर पर किया गया है जिससे कि अन्य सभी गतिविधियों को शुरु किया जा सके. इस संस्था का विकास दोहरे उद्देश्य के लिए किया गया है जिससे कि ग्रामीणों को बैंक द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक विकासात्मक कार्यों से अवगत कराया जा सके और जिन क्षेत्रों में तत्काल कार्रवाई की जरूरत है, उनपर बारीकी से विश्लेषण किया जा सके. एक महीने में दो बैठकें आयोजित की जाती हैं जहाँ वर्तमान की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की जाती है और उपयुक्त प्राधिकारियों के समक्ष इन समस्याओं को रखा जाता है. किसान क्लब की सेवाएं पास में हो रहे विकास कार्य के लिए उपयोग की जाती हैं.

 

ख) 100% बैंकिंग अभ्यस्त गांव- पूरे गांव के सभी परिवारों के पास बैंक खाते हैं तथा जब और जैसे संभव होता है वह अपनी आय के हिस्से की नियमित रूप से बचत करते हैं. बैंक में बड़ी संख्या में खाते खुल रहे हैं और बड़ी संख्या में किसान अब खेती प्रथाओं के लिए ऋण का लाभ उठाने के योग्य हैं.

 
ज्ञान और प्रशिक्षण शिविर -
i) किसान क्लब को दैनिक शीट कैलेंडर और महत्वपूर्ण सरकारी विभागों और अन्य सेवा आउटलेट की टेलीफोन निर्देशिका प्रदान की जाती है.
ii) जैविक उर्वरक और खाद और कृषि उत्पादकता में उनके महत्व पर एक सम्मेलन आयोजित किया गया.
iii) कृषि विश्वविद्यालय और बागवानी विभाग के समन्वय में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें नाबार्ड के अधिकारियों ने भाग लिया जहाँ स्थानीय किसानों के लाभ के लिए एक जानकारी पुस्तक भी जारी की गई.
iv) नए कृषि विकास और प्रथाओं पर नवीनतम प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए प्रतिनिधियों को नाबार्ड द्वारा आयोजित शिविरों में भेजा गया.
v) ग्राम नेगामम पशु चिकित्सा अस्पताल के सहयोग से एक नि: शुल्क पशु शिविर का आयोजन किया गया.
vi) नारियल के साथ एक अंतर फसल के रूप में कोको की खेती करने के लिए एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिससे कि किसानों को अतिरिक्त आय पैदा करने में मदद मिल सके. इस संगोष्ठी में कैडबरी इंडिया लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने कोको से मुफ्त नमूने और उर्वरक वितरित किए.
ग) अवसंरचना विकास :
i) सरकारी विभागों के समन्वय में गांव की सड़कों की मरम्मत की गई और उन्हें आसानी से सुलभ बनाया गया.
ii) भूमिगत जल स्तर के पुनर्भरण के लिए किसानों की जमीन पर वर्षा जल का संचयन और संरक्षण तालाबों का निर्माण किया गया और सरकारी सब्सिडी भी उपलब्ध कराई गई.
iii) स्वास्थ्य जागरूकता- पास के अस्पतालों की मदद से रक्त दान और मुफ्त नेत्र शिविरों का प्रतिवर्ष आयोजन किया जाता हैं.
iv) शिक्षा- पिछले दो वर्षों से बाल दिवस पर मेधावी छात्रों को पुरस्कार और प्रमाण पत्र से सम्मानित किया जाता है. स्कूल में एक पुराने छात्र संघ का भी निर्माण किया गया है.
v) मुख्य उपलब्धि- हमारे बैंक और किसान क्लब ने सर्वश्रेष्ठ प्रायोजक बैंक और सर्वश्रेष्ठ किसान क्लब के लिए नाबार्ड द्वारा राज्य स्तर का पुरस्कार जीता.
 
यूनियन आदर्श ग्राम, ओशबाली में की गईं विकासात्मक गतिविधियों पर केस-स्टडी
ओशबाली पश्चिम बंगाल के उन हजारों में से एक है, जो गरीबी, निरक्षरता, अस्वस्थ्य जीवन दशा और संबंधित सामाजिक समस्याओं से ग्रस्त था और यह तब तक इन समस्याओं का सामना कर रहा था जब तक की यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने आदर्श ग्राम योजना के तहत इसे गोद नहीं लिया जिसने गांव को एक आशा की किरण दिखाई और गांव को विकास के पथ की ओर अग्रसर किया.
 
गांव के बारे में:- हुगली जिले में स्थित एक छोटा सा गांव जिसकी आबादी लगभग 1995 है जिसमें से अधिकांश कृषि मजदूरों के रुप में कार्य कर रहे हैं या पास के शहरी क्षेत्रों के आभूषण विनिर्माण इकाइयों में श्रमिकों के रूप में काम कर रहे हैं. 40% से भी अधिक जनसंख्या बीपीएल श्रेणी के अंतर्गत आती है. साक्षरता दर औसतन 63.86% है, जबकि शिशु मृत्यु दर नियंत्रण में है और औसत जीवन प्रत्याशा दर लगभग 70 वर्ष है.
 
किए गए विकासात्मक कार्य -
 
क) 100% बैंकिंग अभ्यस्त गांव- पूरे गांव के सभी परिवारों के पास बैंक खाते हैं और जब और जैसे संभव होत है वह अपनी आय के हिस्से की नियमित रूप से बचत करते हैं. बैंक में बड़ी संख्या में खाते खुल रहे हैं और बड़ी संख्या में किसान अब खेती प्रथाओं के लिए ऋण का लाभ उठाने के योग्य हैं. बैंक के पास लगभग 440 खाते हैं जिसमें जमा धनराशि लगभग 84.58 लाख रुपये है. बैंक ने नो-फ्रिल खाते खोले हैं और लोगों को बैंक के नए उत्पाद के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए नियमित कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है और साथ ही उनकी वित्तीय आवश्यकताओं की योजना बनाने में उनकी सहायता की जाती है.
ख) स्वास्थ्य जागरूकता- पंचायत कार्यालय में एक होम्यो-क्लीनिक शुरू किया गया है क्योंकि गांव में कोई भी स्वास्थ्य या उप स्वास्थ्य केन्द्र नहीं है.
ग) किसानों को प्रशिक्षण- कृषि क्षेत्र में हो रहे विकास के बारे में किसानों को जानकारी प्रदान करने के लिए पंचायत अधिकारियों की मदद से प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया गया.
घ) सरकारी योजनाओं का कार्यान्वयन- गांव के समग्र विकास के लिए ब्लॉक विकास अधिकारियों के साथ मिलकर बैंक ग्रामीणों को प्रधानमंत्री रोजगार योजना, इंदिरा आवास योजना और एनआरईजीपी जैसी सरकारी योजनाएं उपलब्ध कराने में सफल रहा है.
 
निम्नलिखित सुविधाएं प्राप्त करने के लिए धन की आवश्यकता का आकलन:
 

क्षेत्र

आवश्यकता का मूल्यांकन

आवश्यकता

राशि(रुपये में)

स्वच्छता

उचित स्वच्छता सुविधाओं की कमी के कारण मच्छरों द्वारा फैलाए गए रोगों का सामना करना.

सामुदायिक शौचालय(संख्या में 10)

100000

शिक्षा

क्लब परिसर के अंदर प्राथमिक विद्यालय चल रह है जिसमें कोई भी उचित डेस्क, पुस्तकालय, कंप्यूटर, आदि नहीं है.

स्कूल भवन का निर्माण और बैंक के ग्राहकों के बच्चों को बुनियादी सुविधाएं और छात्रवृत्ति उपलब्ध कराना

 

स्वास्थ्य

वर्तमान में कोई भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं

सुरक्षित पानी पीने के लिए ट्यूब-वेल की स्थापना (5)

75000

कुल

 

 

 

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


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