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Image एमएसएमई मूल्यांकन

    एमएसएमई प्रस्ताव मूल्यांकन के चार चरण हैं :
  • प्रोमोटरों एवं प्रस्तावित गतिविधियों के बारे में समुचित सावधानी.
  • तकनीकी-आर्थिक साध्यता अध्ययन का आयोजन.
  • वित्तीय मूल्यांकन उपक्रम एवं ऋण आवश्यकताओं का निर्धारण.
  • ऋण जोखिम रेटिंग, अधिग्रहण किए गए कोड का अनुपालन एवं निर्णय.
  • शाखाओं द्वारा प्रत्यायोजित ऋण प्रस्तावों को शाखाओं स्तर पर मंजूरी दी जाती है एवं उनका निपटान किया जाता है.

बैंक ने अपने विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में सरल केन्द्रों की स्थापना की है, जहां सभी गतिविधियां को संबंधित शाखा के संपर्क में एकल स्रोत अवधारणा के अंतर्गत की जाती हैं, निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए शाखा प्रमुख के प्रत्यायोजन पर उन सरल केन्द्रों में प्रक्रिया की जाती है, जहां वे परिचालन में हैं.

जहां सरल परिचालन में नहीं हैं, वहाँ शाखाओं द्वारा संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों के क्रेडिट विभाग द्वारा प्रस्ताव प्राधिकरण की मंजूरी के लिए प्रेषित की जाती हैं एवं इसकी प्रति नियंत्रक कार्यालयों को भेजी जाती हैं.

सूक्ष्म एवं लघु उद्यम ऋणी के `5.00 करोड़ तक की कार्यशील पूंजी की आवश्यकता का निर्धारण आवर्त विधि के आधार पर किया जाता है, जिसमें पूर्वानुमानित प्राप्य बिक्री आवर्त का 25% आवश्यक कार्यशील पूंजी के रूप में गणना की जाती है, जिसमें 20% बैंक के द्वारा उपलब्ध कराई जाती है एवं शेष 5% प्रोमोटर के योगदान के रूप में मार्जिन मुद्रा द्वारा के रूप में दी जाती है. एमएसई ऋणी के `5.00 करोड़ से अधिक कार्यशील पूंजी की आवश्यकता का लचीले बैंक वित्त विधि के आधार पर निर्धारण किया जाता है, जो स्वीकार्य बैंक वित्त विधि के साथ ग्राहकानुकूल दृष्टिकोण का विस्तृत रूप होती है

रु 5.00 करोड़ से अधिक एमएसई ऋणी की कार्यशील पूंजी आवश्यकता का मूल्यांकन ग्राहकानुकूल दृष्टिकोण के साथ लचीले बैंक वित्त विधि के आधार पर किया जाता है, जो कि स्वीकार्य बैंक वित्त विधि का विस्तार होता है, जहां चालू आस्तियों की सीमा को विस्तृत आधार प्रदान किया जाता है तथा अनुमानित चलनिधि के मूल्यांकन के लिए चालू अनुपात का स्वीकार्य स्तर, न्यूनतम अनुपात के स्तर 1.33:1 के स्थान पर 1.17:1 लिया जाता है. ऋण आवश्यकता का आकलन ऋणी के कारोबार संचालन के अनुमानित अध्ययन के आधार पर उद्योग के उत्पादन/प्रसंस्करण चक्र के आधार पर किया जाता है. माल की सूची और प्राप्य के अनुमानित स्तर का परीक्षण पिछली प्रवृति, बाज़ार विकास एवं उद्योग की प्रवृति के अनुरूप किया जाता है. चालू आस्तियों एवं देयताओं के लिए समरूप वर्गीकरण सीएमए डाटा प्रारूप में दिए गए शर्तों पर स्वीकृत होते हैं.

विशिष्ट उद्योगों /मौसमी उद्योगों जैसे सॉफ्टवेयर विकास, निर्माण उद्योग, फिल्म उद्योग, चीनी, उर्वरक इत्यादि के मामले में कार्यशील पूंजी सहित अल्पावधि ऋण का निर्धारण नकदी बजट विधि के आधार पर किया जाता है. अनुमानित लाभप्रदता, तरलता, कर्ज़ भार एवं निधि प्रवाह के अतिरिक्त ऐसे मामलों में, अनुमानित नकदी प्रवाह कार्यशील पूंजी वित्त के लिए उतरदायी होते हैं. .

कर्ज़ चुकौती क्षमता, लाभ-अलाभ क्षमता, आंतरिक प्रतिलाभ दर, कर्ज़ इक्विटी अनुपात, अचल अस्तियां व्याप्ति अनुपात इत्यादि पर निर्णय के बाद परियोजना की आर्थिक दृष्टि से लाभप्रदता के आधार पर सावधि ऋणों का मूल्यांकन किया जाता है.

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