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Image  मुर्गीपालन इकाइयों को वित्त पोषण.

लक्ष्य

  • मुर्गीपालन इकाइयों (जैसे कमर्शियल लेयर, ब्रायलर, मुर्गीपालन ब्रीडिंग इकाई और हैचरी) को वित्त पोषण.

उद्देश्य

  • निम्नलिखित आवश्यकताओं में से किसी को पूरा करने के लिए;
  • ब्रूडर/ग्रोअर और लेयर शेड, फीड गोदाम, श्रमिक क्वार्टर आदि का निर्माण.
  • मुर्गीपालन उपकरण जैसे पिंजरे, फीडर, वाटरर आदि की खरीद.
  • बिजली, दाना, पानी आदि की आपूर्ति के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना.
  • एक दिन के चूजों या अंडे देने के लिए तैयार पुलेट की खरीदी.
  • अधिकतम 120 दिनों के लिए दाना, दवा और पशु चिकित्सा सहायता आदि के संबंध में कार्यशील पूंजी की आवश्यकता को पूरा करना. (सभी लागत संलग्न मूल्यांकन तालिका में दिए गए हैं)
  • उत्पादन बढ़ाने या बेहतर प्रबंधन के लिए इकाई द्वारा अपनाई गई कोई अन्य नवीन गतिविधि.
  • मौजूदा मुर्गीपालन इकाइयों की खरीद / एकमुश्त खरीद.
  • हैचरी इकाइयों को अंडा कक्ष, फ्यूमिगेशन कक्ष, एग कूलिंग कक्ष, अंडे सेने के लिए कक्ष, नर/मादा चूजों की पहचान के लिए कक्ष, टीकाकरण और पैकिंग कक्ष के लिए वित्त पोषण की आवश्यकता होगी. बड़ी मुर्गीपालन इकाइयों को भी एयर कंडीशनर, स्टैंड-बाय जनरेटर आदि की खरीद के लिए वित्तपोषण की आवश्यकता हो सकती है.
  • यह वित्तपोषित की जाने वाली गतिविधियों की सांकेतिक सूची है और व्यावसायिक मुर्गीपालन के तहत किसी भी अन्य बुनियादी ढांचे/अन्य आवश्यकताओं पर विचार किया जा सकता है.
  • गतिविधि प्रत्यक्ष खेती, ठेके पर खेती या एकीकरण द्वारा की जा सकती है.

पात्रता

  • मुर्गी पालन के क्षेत्र में अनुभवी और व्यवसाय चलाने के लिए सक्षम व्यक्ति / संयुक्त व्यक्ति / स्वामित्व फर्म / साझेदारी फर्म / एलएलपी / प्राइवेट लिमिटेड कंपनी / पब्लिक लिमिटेड कंपनी.
  • इकाई तकनीकी रूप से साध्य और आर्थिक रूप से व्यवहार्य होनी चाहिए.
  • मुर्गीपालन के लिए अन्य संगठनों जैसे व्यक्तियों के समूह, संघों, सहकारी समितियों, फेडरेशनों, एफपीओ को भी वित्तपोषित किया जा सकता है.

ऋण सीमा

  • कोई न्यूनतम और कोई अधिकतम ऋण नहीं. मार्जिन का विधिवत अनुसरण करते हुए परियोजना लागत के आधार पर किसी भी राशि का ऋण मंजूर किया जा सकता है.

सुविधा की प्रकृति

  • कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) या सावधि ऋण (टीएल) या समग्र ऋण और आवश्यकता आधारित गैर निधि आधारित सीमाएं.

गैर निधि आधारित सीमाएं:

  • उद्देश्य: उच्च मूल्य/हाई-टेक परियोजनाओं के लिए खाद्य सामग्री/पूंजीगत सामान की खरीद के लिए.
  • बीजी/एलसी के तहत मार्जिन: 25%
  • बीजी के प्रकार: वित्तीय बीजी
  • बीजी एलसी के प्रकार: डीए/डीपी
  • मूल्यांकन: बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार.

आकलन पद्धति/वित्त की मात्रा:

I.लेयर्स, पैरेंट प्रजनक पक्षियों और हैचरी के लिए:

सावधि ऋण का मूल्यांकन :

  • ब्रूडर/ग्रोअर और लेयर शेड, फीड गोदाम, फीड प्लांट, जल स्रोत, ओवरहेड टैंक, श्रमिक क्वार्टर आदि के निर्माण जैसे बुनियादी ढांचे की खरीद/स्थापना/निर्माण के लिए आवश्यकता आधारित सावधि ऋण.
  • मुर्गीपालन उपकरण जैसे पिंजरे, फीडर, वाटरर, स्वचालित दाना मिक्सिंग मशीन आदि की खरीद.
  • बिजली, जनरेटर, दाना, पानी आदि की आपूर्ति के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना.
  • मुर्गीपालन गतिविधि आदि के कोई अन्य घटक.
  • पूर्ण पैमाने पर अंडे का उत्पादन शुरू होने तक पूंजीगत आवर्ती व्यय जैसे कि एक दिन की चूजों की लागत, दाने की लागत, दवाइयां, श्रम, अन्य रखरखाव आदि. दूसरे शब्दों में, अंडे देने /फार्म मेँ अंडे का व्यावसायिक उत्पादन प्राप्त करने तक की लागत.
  • जहां इकाई स्थापित की जानी है वहाँ ऋणी के पास स्वयं की जमीन होनी चाहिए और भूमि की खरीद/अधिग्रहण के लिए कोई ऋण नहीं दिया जाना चाहिए.

नोट: लेयर्स, ब्रायलर और पेरेंट बर्डस के लिए समग्र या परियोजना वित्त के रूप में सावधि ऋण स्वीकृत किया जाना चाहिए और एक दिन के चूजों और दाने की खरीद के लिए लेयर्स, ब्रॉयलर और पेरेंट बर्ड्स के लिए एकल (स्टैंडअलोन) आधार पर कोई सावधि ऋण स्वीकृत नहीं किया जाना चाहिए. वे कार्यशील पूंजी के तहत गिने जाते हैं.

दूसरे शब्दों में, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि केवल आवर्ती लागत (यानी, एक दिन के चूजों की खरीद, दाना सामग्री) को स्टैंडअलोन सावधि ऋण के रूप में वित्तपोषित नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वे कार्यशील पूंजी मूल्यांकन में शामिल हैं. तथापि, उपरोक्त सभी घटकों को सावधि ऋण के रूप में वित्तपोषण के लिए परियोजना/समग्र में शामिल किया जा सकता है.

कार्यशील पूंजी का मूल्यांकन:

लेयर और पेरेंट ब्रीडर बर्ड/ हैचरी के लिए कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं के मूल्यांकन के लिए दाना खपत विधि का उपयोग किया जाता है. (लेयर्स और पेरेंट बर्ड के लिए अलग से गणना शीट संलग्न है. निम्नलिखित के लिए अलग वर्किंग शीट उपलब्ध कराई गई है-

  • सावधि ऋण वाली मुर्गीपालन इकाईयां जहां परियोजना में पक्षी लागत शामिल है.
  • सावधि ऋण रहित मुर्गीपालन इकाईयां जहां परियोजना में पक्षी लागत शामिल नहीं है.

ार्यशील पूंजी का मूल्यांकन बिक्री टर्नओवर पर आधारित नहीं है. दाना सामग्री की मौसमी उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए, पोल्ट्री पक्षियों की आहार आवश्यकताओं के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा. तथापि, शाखाओं को नियमित रूप से टर्नओवर पद्धति की गणना करनी चाहिए और कार्यशील पूंजी के वित्तपोषण के लिए इस पर विचार नहीं करना चाहिए.

II.ब्रायलर पक्षियों के लिए :

  • सावधि ऋण का मूल्यांकन नाबार्ड की इकाई लागत के अनुसार किया जाएगा. घटक जैसे अवसंरचना, उपकरण/मशीनरी और आवर्ती लागत जैसे घटकों को सावधि ऋण में शामिल किया जाना है.
  • ब्रॉयलर इकाइयों के लिए आवश्यकता आधारित कार्यशील पूंजी सीमा की अनुमति दी जानी चाहिए क्योंकि आय छोटी अवधि (6 से 8 सप्ताह) के भीतर प्राप्त होती है.
  • ठेके पर खेती/एकीकरण के मामले में, एकीकरणकर्ता द्वारा एक दिन के चूजों, दाना और दवाइयों की आपूर्ति की जाती है और उधारकर्ता को शेड, श्रम, बिजली और पानी की सुविधा आदि की व्यवस्था करनी होगी. अतः केवल सावधि ऋण स्वीकृत किया जाना है. इसलिए, यह निर्णय लिया गया है कि ठेके पर खेती/एकीकरण में लगे उधारकर्ताओं को कार्यशील पूंजी सीमा स्वीकृत नहीं की जाएगी क्योंकि इसमें कोई प्राथमिक प्रतिभूति का निर्माण नहीं होगा.
  • दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, दो चक्रों, अर्थात प्रति चक्र 8 सप्ताह, के लिए आवर्ती लागतों पर विचार किया जा सकता है. गणना शीट अनुलग्नक के रूप में संलग्न है.
  • जहां इकाई स्थापित की जानी है वहाँ ऋणी के पास स्वयं की जमीन होनी चाहिए और उसे खरीदने/अधिग्रहण के लिए कोई ऋण नहीं दिया जाना चाहिए.
  • व्यापारिक गतिविधियाँ:

  • मुर्गियों, पक्षियों, अंडे, मांस और मुर्गियों के दाने की बिक्री जैसी व्यापारिक गतिविधियां योजना के तहत पात्र नहीं हैं और उन्हें एमएसएमई के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा और मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार स्वीकृत किए जाएंगे.

सीमाओं के मूल्यांकन पर सामान्य दिशानिर्देश:

  • नाबार्ड परियोजना लागत और दिशानिर्देशों के अनुसार परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता के अधीन या
  • नकदी प्रवाह द्वारा समर्थित परियोजना आधारित वित्त (नाबार्ड परियोजना लागत के 20% तक लागत वृद्धि की अनुमति है. संबंधित प्रत्यायोजित प्राधिकारी उचित औचित्य के साथ नाबार्ड इकाई लागत के ±20% पर निर्णय लेने/विचार करने के लिए अधिकृत है.)
  • नाबार्ड द्वारा निर्धारित इकाई लागत केवल सांकेतिक प्रकृति की है. वाणिज्यिक इकाइयों या गतिविधि में किसी भी लागत वृद्धि के मामले में और नाबार्ड इकाई लागत के 20% से अधिक पर विचार करने के लिए, प्रस्ताव को आरएलसीसी और ऊपर की समितियों द्वारा मामल दर मामला आधार पर युक्तिसंगत और उचित मूल्यांकन के साथ निपटाया जाएगा.
  • उन क्षेत्रों के लिए जहां नाबार्ड परियोजना लागत उपलब्ध नहीं है, आस-पास के क्षेत्रों के नाबार्ड के अनुसार परियोजना लागत पर विचार किया जा सकता है.
  • शाखाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रस्ताव नाबार्ड परियोजना लागत के अनुपालन में है. नाबार्ड परियोजना लागत के अधिकतम 20% तक की उच्च लागत वाली परियोजनाओं पर विचार करने के लिए, इसका उचित मूल्यांकन और औचित्य होना चाहिए और यह मूल्यांकन/प्रक्रिया नोट का एक हिस्सा होना चाहिए.
  • इकाई लागत/नाबार्ड/राज्य स्तरीय बैंकर समितियों (एसएलबीसी) / एसएलबीसी की विशेष समितियों / राज्य/केंद्र प्रायोजित योजनाओं आदि द्वारा अनुमोदित मुर्गीपालन के किसी घटक में जब भी कोई परिवर्तन होता है तो उसका पालन किया जाएगा.
  • बही ऋण, जो 90 दिनों से अधिक नहीं है, की गणना करते हुए आहरण शक्ति प्राप्त की जा सकती है और यह ऋण सीमा के 50% तक सीमित होगा. उक्त बही ऋण/लेनदारों का विवरण, लेखापरीक्षक द्वारा विधिवत प्रमाणित त्रैमासिक आधार पर प्रस्तुत किया जाना है.
  • जहां भी चूजों/पक्षियों को सावधि ऋण के अंतर्गत पहले से ही घटक के रूप में माना जाता है, वहाँ कार्यशील पूंजी/सीसी सीमा की गणना के लिए चूजों/पक्षियों की लागत नहीं ली जानी चाहिए. ऐसे मामलों में केवल दाना लागत को ही वित्तपोषित किया जाना चाहिए.

दाना फार्मूला और दाना लागत:

  • समामेलित इकाई की सभी शाखाओं के बीच एकरूपता लाने के लिए, उधारकर्ता की पात्रता पर पहुंचने के लिए अनुकूलित प्रारूप का उपयोग किया जाता है.
  • दाना सामग्री की लागत में वृद्धि को देखते हुए, औसत दाना लागत को संशोधित कर लेयरों के लिए 24500 रुपए, ब्रीडर / पेरेंट बर्डस के लिए 30000 रुपए और ब्रॉयलर के लिए 25000 रुपए कर दिया गया है. इसके अलावा, स्थानीय परिस्थितियों और विभिन्न पोल्ट्री पक्षियों के लिए क्षेत्र विशिष्ट दाना फार्मूला / दाना सामग्री को अपनाने के आधार पर, दाने की लागत में 10% तक कमी या वृद्धि पर विचार करने के लिए फील्ड अधिकारियों को एक विकल्प प्रदान किया जाता है. अन्य सभी लागतें जैसे दवाइयां और अन्य विविध लागतें केवल दाना लागत में ही शामिल हैं.
  • चूंकि अलग-अलग उम्र में भोजन की मात्रा/लागत में काफी वृद्धि होती है, पेरेंट बर्डस को उच्च गुणवत्ता वाले दाने के साथ खिलाना पड़ता है और इसलिए व्यावसायिक लेयरों की तुलना में पेरेंट के लिए दाने की लागत अधिक होती है.
  • मुर्गीपालन के विभिन्न चरणों के अनुसार सांकेतिक फीड फॉर्मूला, औसत दाना लागत और पक्षी मूल्य की एक प्रति अनुलग्नक के रूप में संलग्न है. जब भी दाना फार्मूला/दाना लागत/स्थान विशिष्ट दाना फ़ॉर्मूला में कोई परिवर्तन होता है, तो क्षेत्रीय कार्यालय नवीनतम दरों/नाबार्ड इकाई लागत के आधार पर औसत दाना लागत प्राप्त करेगा और शाखाओं को परिचालित करेगा.
  • मार्जिन

    • सावधि ऋण - 25%
    • कार्यशील पूंजी - 25%
    • मुर्गीपालन फार्मों की एकमुश्त खरीद: 40%
    • ठेके पर खेती के तहत कार्यशील पूंजी: 40%

    ब्याज की दर

    योजना के तहत संशोधित ब्याज दर इस प्रकार है (आधार - आईसी संख्या: 1974-2020 दिनांक: 27.03.2020 और आईसी संख्या: 2365-2020 दिनांक: 28.12.2020 और निम्नानुसार संशोधित):

    • रुपए 1.00 करोड़ तक की सीमा के लिए सावधि ऋण और नकद ऋण दोनों के लिए (कोई न्यूनतम ऋण राशि नहीं).

    सीमा

    लागू ब्याज दर

      संशोधित ब्याज दर

    1.00 करोड़ रुपए तक के ऋण

    एमसीएलआर+0.75%

      एमसीएलआर+0.50%

    • सावधि ऋण और नकद ऋण दोनों के लिए रुपए 1.00 करोड़ से रुपए 25.00 करोड़ तक की सीमा के लिए निम्नानुसार है:
    • आंतरिक रेटिंग

      20 करोड़ रुपए तक लागू ब्याज दरें

        20 करोड़ रुपए से 25 करोड़ रुपए तक लागू ब्याज दरें

        योजना के तहत संशोधित ब्याज दरें

      सीआर/यूबीसी-1

      एमसीएलआर+0.70%

        एमसीएलआर+2.65%

        एमसीएलआर+0.10

      सीआर/यूबीसी-2

      एमसीएलआर+0.75%

        एमसीएलआर+2.90%

        एमसीएलआर+0.25%

      सीआर/यूबीसी-3

      एमसीएलआर+0.80%

        एमसीएलआर+3.20%

        एमसीएलआर+0.35%

      सीआर/यूबीसी-4

      एमसीएलआर+0.95%

        एमसीएलआर+3.70%

        एमसीएलआर+0.45%

      सीआर/यूबीसी-5

      एमसीएलआर+4.15%

        एमसीएलआर+4.30%

        एमसीएलआर+1.00%

    रुपए 25.00 करोड़ से ऊपर की सीमा के लिए सावधि ऋण और नकद ऋण दोनों के लिए निम्नानुसार है:(संशोधित):

    बाहरी रेटिंग*

    आंतरिक रेटिंग

    एएए

    एए

    बीबीबी

    बीबी

    ए1+

    ए1

    ए2

    ए3

    ए4

    सीआर-1

    एमसीएलआर

      एमसीएलआर+0.10%

      एमसीएलआर+0.25%

      एमसीएलआर+0.40%

      एमसीएलआर+0.55%

    सीआर-2

    एमसीएलआर+0.10%

      एमसीएलआर+0.20%

      एमसीएलआर+0.35%

      एमसीएलआर+0.50%

      एमसीएलआर+0.65%

    सीआर-3

    एमसीएलआर+0.20%

      एमसीएलआर+0.30%

      एमसीएलआर+0.50%

      एमसीएलआर+0.65%

      एमसीएलआर+0.80%

    सीआर-4

    एमसीएलआर+0.30%

      एमसीएलआर+0.40%

      एमसीएलआर+0.60%

      एमसीएलआर+0.80%

      एमसीएलआर+1.00%

    सीआर-5

    एमसीएलआर+0.40%

      एमसीएलआर+0.60%

      एमसीएलआर+0.75%

      एमसीएलआर+1.00%

      एमसीएलआर+1.25%

    टिप्पणी: *

    • उपरोक्त ब्याज दर में टर्म प्रीमियम शामिल है.
    • केवल 1 करोड़ रुपए से ऊपर के अग्रिमों के लिए ही आंतरिक क्रेडिट रेटिंग सीआर/यूबीसी-5 और इससे बेहतर वाले खातों पर विचार किया जाएगा. नवीनीकरण के दौरान, यदि 1.00 करोड़ रुपए से 25.00 करोड़ रुपए तक हर्डल रेट (अर्थात,सीआर-5) के नीचे की रेटिंग को डाउनग्रेड किया जाता है और बाहरी रेटेड खातों के संबंध में बीबी/ए4 से नीचे डाउनग्रेड किया गया खाता योजना के तहत रियायत दर के लिए अपात्र हो जाएगा. अपात्र और गैर-रेटेड खातों के लिए, लागू ब्याज दर मास्टर टेबल ए-1/बी1 (एमएसएमई के अलावा) के अनुसार आईसी संख्या 1974 दिनांक 27.03.2020 के अनुसार निर्धारित किया जाना है.
    • सीएसी III तक प्रत्यायोजित प्राधिकारों के लिए ब्याज दर में कोई अतिरिक्त रियायत नहीं दी जाएगी. अनुमोदित कार्ड दरों में कोई भी अतिरिक्त रियायत सीएसी-II और उससे उच्चतर द्वारा उनके संबंधित प्रत्यायोजन के भीतर प्रदान की जा सकती है.
    • यदि खाता एनपीए/दबाव में चला जाता है या अन्य बैंकों या वित्तीय संस्थाओं द्वारा ले लिया जाता है/मंजूरी के नियमों और शर्तों का पालन नहीं किया जाता है, तो पैन इंडिया योजना के अनुसार रियायती ब्याज़ दर को पूर्वव्यापी प्रभाव से वापस लिया जाना है अर्थात विस्तार की तिथि से ब्याज दर दी जाने की तारीख से तदनुसार, एक वचनपत्र प्राप्त किया जाना है. इसके अलावा, शाखाओं को आईसी नं. :1974-2020 दिनांक: 27.03.2020, टेबल एफ़19 और मास्टर टेबल ए1/बी1 (एमएसएमई के अतिरिक्त) के अनुसार ब्याज दर प्रदान करनी होगी.
    • एक तिमाही में 30 दिनों से अधिक समय तक दबाव में रहने वाले खाते भी रियायतों के लिए अपात्र हो जाएंगे और लागू ब्याज़ दर को मौजूदा मास्टर तालिका ए-1 / बी-1 (एमएसएमई के अतिरिक्त) के अनुसार आईसी नं.:1974-2020 दिनांक: 27.03.2020. के अनुसार निर्दिष्ट किया जाएगा. पूर्व तिमाही के तुरंत बाद से लगातार मानक (बिना किसी अतिदेय के) बने रहने पर अगली तिमाही में खाता पुनः रियायत प्राप्त करने के लिए पात्र हो जाएगा.
    • उदाहरण के लिए, यदि खाता 10.10.2022 को एसएमए-0 के अंतर्गत आता है (अर्थात्, 09.11.2022 को एसएमए-1), तो इसे 31.12.2022 तक मानक पर वापस आ जाना चाहिए और 01.04.2023 से पुनः रियायत प्राप्त करने के लिए बाद की पूरी तिमाही यानी 01.01.2023 से 31.03.2023 तक मानक श्रेणी बना रहना चाहिए. दूसरे शब्दों में, एसएमए-1 श्रेणी के अंतर्गत आने वाले खाते रियायतों के लिए पात्र नहीं हैं. शाखाओं को खातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए और राजस्व क्षरण से बचना चाहिए.

    स्पष्टीकरण:

    • एएए से बीबी और नीचे की बाहरी क्रेडिट रेटिंग दीर्घ अवधि के ऋण (टीएल और सीसी जैसी निधि आधारित सीमाओं) के लिए हैं और ए1+ से ए4 और नीचे की रेटिंग अल्पावधि ऋण (गैर निधि आधारित सीमाओं) के लिए हैं.
    • कृषि ऋण के मामले में, क्रेडिट रेटिंग 1.00 करोड़ रुपए तक की ब्याज दर से जुड़ी नहीं है. तथापि, शाखाओं को सलाह दी जाती है कि वे रेटेड खातों के लिए जोखिम प्रावधान को कम करने हेतु 25 लाख रुपए से 100 लाख रुपए तक के ऋण के लिए क्रेडिट रेटिंग प्राप्त करें.
    • सीआर/यूबीसी-5 से नीचे की आंतरिक क्रेडिट रेटिंग वाले खातों, बीबी से नीचे की बाहरी क्रेडिट रेटिंग और गैर-श्रेणी वाले खातों को ऋण नीति के अनुसार वित्तपोषित किया जाएगा. तथापि इन खातों को मुर्गी पालन वित्त की अखिल भारतीय योजना के तहत कवर किया जा सकता है, ब्याज़ दर आईसी 1974-2020 दिनांक 27.03.2020 या समय-समय पर जारी ऐसे अन्य लागू दिशानिर्देशों के अनुसार लागू होगी.

    सेवा शुल

    • प्रसंस्करण शुल्क: जैसा लागू हो
    • प्रलेखीकरण शुल्क - जैसा लागू हो
    • निरीक्षण शुल्क - जैसा लागू हो
    • अन्य सेवा शुल्क - जैसा लागू हो
    • (आईसी संख्या:03454-2022 दिनांक: 25.07.2022 एवं समय-समय पर जारी परिपत्रों के अनुसार)

    क्रेडिट रेटिंग

    आंतरिक रेटिंग:

    • रु. 5.00 करोड़ तक के अग्रिमों के लिए: रु. 5.00 करोड़ तक के समग्र जोखिम वाले उधारकर्ताओं के संबंध में क्रेडिट रेटिंग करने के लिए यूबीआई मॉडल का उपयोग किया जाएगा.
    • 5.00 करोड़ रुपए से अधिक के अग्रिमों के लिए: 5 करोड़ रुपए से अधिक के कुल ऋण जोखिम या पिछले तीन वर्षों में 25 करोड़ रुपए के औसत कारोबार या 25 करोड़ रुपए से अधिक के तीन वर्षों के औसत अनुमानित कारोबार वाले उधारकर्ताओं के मामले में, संबंधित खातों की आंतरिक रेटिंग के लिए क्रिसिल रैम मॉडल का पालन किया जाना है और क्रिसिल रैम रेटिंग मॉडल के तहत उधारकर्ताओं की हर्डल रेटिंग नए उधारकर्ताओं के लिए सीआर5/यूबीसी5 और टेकओवर खातों के लिए सीआर4/यूबीसी4 होगी.
    • मौजूदा खातों के लिए हर्डल रेटिंग सीआर/यूबीसी5 है. सीआर/यूबीसी-5 से कम रेटिंग वाले खातों पर योजना के तहत ब्याज़ दर रियायतों के लिए विचार नहीं किया जाएगा. क्रिसिल रैम मॉडल के तहत हर्डल रेटिंग नए उधारकर्ताओं के लिए सीआर5/यूबीसी5 और टेकओवर खातों के लिए सीआर4/यूबीसी4 है.

    बाहरी रेटिंग:

    • नवीनतम क्रेडिट नीति के अनुसार, 25 करोड़ रुपए (बैंकिंग प्रणाली से एक्सपोजर) से अधिक निधि आधारित और गैर-निधि आधारित सुविधा का लाभ लेने वाले सभी खातों को आरबीआई द्वारा मान्यता प्राप्त बाहरी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा रेट किया जाना है. नए/मौजूदा खातों के लिए हर्डल दर बीबी है और खातों के अधिग्रहण के लिए यह बीबीबी है. योजना के तहत बीबी से नीचे की रेटिंग या बिना रेटिंग वाले खातों पर विचार नहीं किया जाएगा.

    अधिग्रहण मानदंड

    मौजूदा ऋण नीति के अनुसार.

    प्राथमिक प्रतिभूति

    • कैश क्रेडिट / कार्यशील पूंजी सीमा: बैंक वित्त से निर्मित संपत्ति का दृष्टिबंधक, फीड स्टॉक्, पक्षियों, दवाइयों, फीड सामग्री, अंडों का दृष्टिबंधक और अन्य चालू आस्तियों आदि पर ऋण भार.
    • सावधि ऋण: भूमि और भवनों, शेड, सिविल निर्माण और अन्य लौजिस्टिक आदि का बंधक और बैंक निधि से सृजित संयंत्र और मशीनरी, उपकरण और आस्तियों का दृष्टिबंधक.
    • कार्यशील पूंजी सीमा में आहरण शक्ति की गणना करते समय, पोल्ट्री पक्षी के मूल्य पर भी विचार किया जाना चाहिए जहां परियोजना में कोई सावधि ऋण बकाया नहीं है / कोई पोल्ट्री पक्षी की लागत नहीं ली गई है. एक विस्तृत सप्ताहवार पक्षी मूल्य चार्ट अनुलग्नक में दिया गया है.

    संपार्श्विक प्रतिभूति

    • अचल संपत्तियों, भूमि और भवन का बंधक.
    • भूमि का बंधक या उसकी कोई अन्य संपार्श्विक प्रतिभूति बैंक को स्वीकार्य है (भूमि का स्वीकृत मूल्य या अन्य संपार्श्विक प्रतिभूति ऋण राशि के 110% से अधिक होनी चाहिए)
    • सावधि ऋण की प्राथमिक प्रतिभूति के अवशिष्ट मूल्य/स्पिल ओवर का (जोखिम के 150% को घटाने के उपरांत या सावधि ऋण की मंजूरी के लिए स्वीकृत मार्जिन में से जो भी अधिक हो) विस्तार किया जा सकता है. दूसरे शब्दों में, मौजूदा ऋण बकाए के 150% से अधिक की अन्य अवशिष्ट प्राथमिक प्रतिभूति (केवल भूमि और भवन) को ऋण सुविधा के लिए संपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में स्वीकार करना. संपार्श्विक कवरेज के लिए केवल भूमि (उधारकर्ता के स्वामित्व वाली) और भवन पर विचार किया जाना चाहिए न कि मशीनरी, पिंजरों आदि जैसी अन्य आस्तियों पर.
    • हालांकि, संपार्श्विक कवरेज के लिए भूमि का मूल्य (पहले से ही उधारकर्ता के स्वामित्व में है जो सरफेसी के अनुरूप है) पर विचार किया जा सकता है.
    • नए/अधिग्रहण/ऋण सीमाओं में वृद्धि के लिए, खुले प्लॉट (अर्थात्, सरफेसी लागू करने योग्य संपत्तियों) को आरएलसीसी तक अगले उच्च प्राधिकार पर संपार्श्विक प्रतिभूति के रूप में माना जा सकता है. ज़ेडएलसीसी और उससे ऊपर के मामले में, संबंधित समितियां अपने प्रत्यायोजनाओं में प्रस्तावों पर विचार कर सकती हैं. मौजूदा स्तर पर सीमाओं के नवीकरण के मामले में, स्वीकृति के लिए उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव भेजे बिना खुले प्लॉट की मौजूदा संपत्तियों को जारी रखा जाएगा. यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि खुले प्लॉट की संपत्ति स्पष्ट रूप से सीमांकित है और ज़मीन बंद नहीं होनी चाहिए.
    • कृषि भूमि अधिनियम 2006 (गैर कृषि उद्देश्यों के लिए रूपांतरण) में संशोधन करने के लिए 2012 के आंध्र प्रदेश अधिनियम संख्या 16 दिनांक 14.05.2012 के अनुसार कृषि भूमि को गैर कृषि उद्देश्यों में परिवर्तित करने की अनुमति जलीय कृषि, डेयरी और मुर्गी पालन के लिए उपयोग की जाने वाली भूमि के लिए आवश्यक नहीं है तदनुसार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के लिए एनएएलए (गैर कृषि भूमि रूपांतरण) प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है. यदि कोई राज्य सरकार इस तरह की अधिसूचना जारी करती है, तो इसे भूमि रूपांतरण प्रमाणपत्र (एनएएलए) की छूट या राज्य अधिनियमों के अनुसार पालन करने पर विचार किया जा सकता है. शाखाओं/मंजूरी देने वाले अधिकारियों को भविष्य में किसी भी चूक के लिए सरफेसी को लागू करने हेतु एनएएलए प्रमाणपत्र प्राप्त करने की संभावनाओं का पता लगाने चाहिए.
    • जहां भी प्राथमिक सुरक्षा सरफेसी अधिनियम के अनुरूप नहीं है या राज्य के कानूनों के अनुसार भूमि उपयोग प्रमाणपत्र का रूपांतरण आवश्यक / आवश्यक नहीं है, तो ऋण राशि के 150% के न्यूनतम मूल्य की संपार्श्विक प्रतिभूति प्राप्त की जानी है.
    • इसके अलावा, मौजूदा प्रतिभूतियों को नियमित रूप से मुक्त नहीं किया जाना चाहिए. सरफेसी संगत संपत्तियों के साथ मौजूदा प्रतिभूतियों के प्रतिस्थापन को समान या उच्च मूल्य के साथ ही अनुमति दी जा सकती है.
    • मौजूदा प्रतिभूतियों को मुक्त करने के लिए उधारकर्ताओं से प्राप्त अनुरोध के मामले में, ऐसे प्रस्तावों/अनुरोधों में एक स्तर के उच्च अधिकारी को रखा जाएगा, जो सभी सीमाओं के लिए न्यूनतम 150% संपार्श्विक कवरेज सुनिश्चित करेगा. इसके अलावा, ज़ेडएलसीसी और उससे ऊपर की समितियां न्यूनतम 150% संपार्श्विक प्रतिभूति के साथ उचित औचित्य को शामिल करते हुए अपने संबंधित प्रत्यायोजन में अनुमोदन कर सकती हैं.
    • सीजीएफएमयू/सीजीटीएमएसई के तहत कवरेज: समय-समय पर जारी योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार मुर्गी पालन जैसी संबद्ध गतिविधियों के लिए स्वीकृत ऋण को सीजीएफएमयू/सीजीटीएमएसई के तहत कवर किया जा सकता है. इसके अलावा, क्रेडिट गारंटी योजना के सभी नियमों और शर्तों / दिशानिर्देशों का पालन किया जाना है. (संदर्भ आईसी संख्या: 3805-2017 दिनांक 16.05.2017- पीएमएमवाई के तहत संबद्ध गतिविधियों के कवरेज पर मंत्रालय के दिशानिर्देश).
    • क्रेडिट गारंटी शुल्क उधारकर्ता द्वारा वहन किया जाना है.
    • इस योजना के तहत क्रेडिट गारंटी के अंतर्गत कवर की गई ऋण सीमाओं से अधिक हेतु संकर प्रतिभूति की अनुमति है और परिपत्र में उल्लिखित संपार्श्विक प्रतिभूति मानदंडों का पालन किया जाएगा.
    • 200 लाख रुपए की क्रेडिट गारंटी सीमा से अधिक होने पर, संकर प्रतिभूति/यथा लागू मानदंड के अनुसार संपार्श्विक प्रतिभूति प्राप्त की जानी चाहिए.

    पट्टे पर दी गई भूमि पर स्थापित मुर्गी पालन इकाइयों को वित्त पोषण

    मुर्गी पालन और अन्य गतिविधियों के लिए पट्टे पर दिए गए शेड/भूमियों में गुण-दोष के आधार पर ऋण दिया जाएगा. फील्ड स्तर के कर्मचारियों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे प्रस्तावों पर कार्रवाई करते समय निम्नलिखित सुनिश्चित करें.

    • पट्टे की शर्तों, हमारे मानदंडों के अंतर्गत इसके अनुपालन, पट्टे पर दी गई संपत्ति पर पट्टेदार का हक़ आदि के बारे में कानूनी राय प्राप्त करें. इसके अलावा, अग्रिम की सुरक्षा हेतु यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पंजीकृत पट्टा विलेख को कानून के अनुसार तब तक लागू रखा जाए जब तक कि ऋण का परिसमापन न हो जाए.
    • पट्टेदार द्वारा शेड/इकाइयों को पट्टे पर देने के कारणों का पता लगाना और संतुष्ट होना.
    • सुनिश्चित करें कि ऐसी संपत्ति पर किसी भी बैंक/वित्तीय संस्थान से कोई अन्य ऋण/ऋण-भार नहीं है.
    • पट्टेदार द्वारा सह-बाध्यकारी या गारंटर के रूप में शामिल होने की संभावना का पता लगाना.
    • पट्टे पर दी गई भूमि पर मुर्गी पालन के लिए दिए गए ऋण के मामले में, 150% संपार्श्विक प्रतिभूतियां प्राप्त की जाए, जो सरफेसी के अनुरूप हैं.

    व्यक्तिगत गारंटी

    पर्याप्त संसाधन रखने वाली फर्म/कंपनी के साझेदारों, प्रवर्तक/प्रवर्तक निदेशकों की व्यक्तिगत गारंटी और प्राथमिक/संपार्श्विक प्रतिभूति को गिरवी रखने वाले सभी की व्यक्तिगत गारंटी प्राप्त की जानी चाहिए. स्वामित्व प्रतिष्ठान के मामले में, तीसरे पक्ष या परिवार के किसी अन्य सदस्य की व्यक्तिगत गारंटी प्राप्त की जानी चाहिए. किसी भी छूट/विचलन से बैंक की ऋण नीति के अनुसार निपटान किया जाएगा.

    बीमा

    बुनियादी ढांचा, स्टॉक-फीड, दवाइयां, और पक्षी, संयंत्र और मशीनरी/उपकरण आदि के लिए बैंक की ऋण नीति के अनुसार वित्तपोषित संपत्ति का बीमा किया जाना है

    पशुधन के मामले में बीमा की छूट

    • पक्षी बीमा की छूट इस शर्त के साथ दी जा सकती है कि पार्टी रू. 5/-प्रति पक्षी (ब्रायलर, लेयर और मूल पक्षी) प्रति वर्ष की दर से जोखिम शमन निधि (आर एम एफ) बनाएगा और इसे ऑटो नवीकरण के साथ सावधि जमा के रूप में बनाए रखने के लिए बाध्य होता है.
    • तथापि, संबंधित मंजूरी देने वाले अधिकारी इसमें शामिल जोखिम के आधार पर प्रति पक्षी 5 रुपए से अधिक का आरएमएफ निर्धारित कर सकते हैं.
    • कॉर्पस को फार्म में ब्रायलर, लेयर और पेरेंट बर्ड की पूर्ण (लेयरों की अधिकतम संख्या) क्षमता से संबद्ध किया जाएगा. इस प्रकार सृजित आरएमएफ को केवल आकस्मिकता या सभी सीमाओं के पूर्ण रूप से बंद होने की स्थिति में ही समायोजित किया जाएगा. इसे स्वीकृति प्राधिकारी के अनुमोदन से समायोजित किया जा सकता है.
    • यदि, संपार्श्विक सुरक्षा कवरेज 150% से अधिक है तो मंजूरी देने वाले अधिकारियों द्वारा उधारकर्ता से अलग अनुरोध पर आरएमएफ को माफ किया जा सकता है.

    प्रत्यायोजन

    शक्तियों के प्रत्यायोजन पर मौजूदा नीति के अनुसार.

    समुचित सावधानी

    मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार समुचित सावधानी बरतनी चाहिए;

    • वर्तमान लागत परिदृश्य के परिप्रेक्ष में और समय-समय पर ऋण नीति में निर्धारित शर्तों के अनुसार सावधि ऋण और कार्यशील पूंजी का मूल्यांकन बैंक के मानदंडों के अनुसार किया जाएगा.
    • मामला दर मामला आधार पर इकाई की तकनीकी साध्यता और आर्थिक व्यवहार्यता की जांच करने के लिए शाखा अधिकारियों द्वारा मंजूरी पूर्व निरीक्षण किया जाना चाहिए;
    • बैंक की ऋण नीति के अनुसार वित्तीय बेंचमार्क और अन्य मानदंड.
    • सिबिल (उपभोक्ता/वाणिज्यिक) रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए और उधारकर्ताओं/गिरवी रखने वालों के क्रेडिट इतिहास का अध्ययन किया जाना चाहिए.
    • 1.00 करोड़ रुपए से अधिक के ऋणों के लिए तकनीकी निरीक्षण तकनीकी अधिकारी द्वारा किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पोल्ट्री में सभी पूर्वापेक्षाओं का पालन किया जा रहा है.

    चुकौती

    कार्यशील पूंजी/सावधि ऋण

    • मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार नवीकरण के अधीन, 12 माह हेतु कार्यशील पूँजी.
    • सावधि ऋण के लिए अधिकतम 84 महीने (आय सृजन / नकदी प्रवाह पर विचार करते हुए अधिकतम 6 से 12 महीने के अधिस्थगन सहित)

    मौसमी आवश्यकता के लिए अतिरिक्त सुविधा

    • योजना के अनुसार, एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 2 महीने की अवधि के लिए मौजूदा मुर्गी पालन फार्म के लिए कुल कार्यशील पूँजी ऋण सीमा के 20% तक की मौसमी सीमा की अनुमति दी जा सकती है. नियमित कार्यशील पूंजी ऋण सीमा के अलावा, वित्तीय वर्ष के दौरान 30 दिनों के अंतराल के साथ तीन बार इस सीमा की अनुमति दी जा सकती है, जो प्रारंभिक आहरण के समायोजन की शर्त पर है.
    • इसे टॉप अप ऋण के रूप में नियमित सीमा के समय/फसलों की कटाई अवधि के दौरान उधारकर्ता की आवश्यकता अनुसार स्वीकृत किया जा सकता है. मौसमी सीमा की स्वीकृति के लिए एक अनुरोध पत्र प्राप्त किया जाए. इसके अलावा, समय में अतिरिक्त सीमा के समायोजन के लिए एक वचन पत्र प्राप्त किया जाएगा.
    • यह सुविधा केवल वास्तविक मामलों में ही स्वीकृत की जाएगी न कि नियमित रूप से क्योंकि पात्रता को उदार बनाया गया है.
    • तथापि, ऐसी अतिरिक्त ऋण सीमाओं के लिए लगाए जाने वाले 1% अतिरिक्त ब्याज लगाया है. इसके अलावा, देय तिथि पर सीमा को समायोजित करने में किसी भी देरी के लिए 2% का दंडात्मक ब्याज लगाया जाना है.
    • अतिरिक्त ऋण सीमाओं के लिए भी संपार्श्विक प्रतिभूति मानदंडों का अनुपालन किया जाना चाहिए.

    मौजूदा पोल्ट्री इकाइयों की खरीद के लिए दिशानिर्देश

    मौजूदा मुर्गी पालन इकाइयों की खरीद / एकमुश्त खरीद :

    • शाखाएं मौजूदा मुर्गीपालन इकाइयों की एकमुश्त खरीद के रूप में खरीद से संबंधित प्रस्तावों पर विचार कर सकती हैं, जहां भूमि, भवन, शेड, संयंत्र और मशीनरी पर विचार किया जाना है. ऋण राशि की गणना के लिए पंजीकृत बिक्री विलेख / इंजीनियर मूल्य, जो भी कम हो, में उल्लिखित मूल्य स्वीकार किए जाएंगे.
    • परियोजना लागत/रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा इकाइयों के आवश्यक बुनियादी ढांचे की मरम्मत/जोड़ने के मामले में भी वित्तपोषण किया जा सकता है.
    • मौजूदा स्थापित मुर्गीपालन इकाइयों की खरीद/एकमुश्त खरीद के मामले में, बिक्री मूल्य/पंजीकृत मूल्य/इंजीनियर मूल्य, जो भी कम हो, पर 40% मार्जिन पर जोर दिया जाएगा.
    • तथापि, नवीनतम इंजीनियर मूल्यांकन रिपोर्ट प्राप्त की जानी है और रिकॉर्ड में रखी जानी है.
    • परियोजना के आधार पर, उधारकर्ता को आवश्यक अधिस्थगन प्रदान किया जाएगा.
    • अधिस्थगन सहित अधिकतम 84 महीनों के अधीन गतिविधि से नकदी प्रवाह के आधार पर चुकौती अनुसूची तैयार की जानी चाहिए.
    • अधिमानी तौर पर इकाई के निर्माण की आयु 15 वर्ष से कम होनी चाहिए. किसी भी विचलन के मामले में, मामला दर मामला आधार पर औचित्य के साथ एक स्तर उच्च प्राधिकारी द्वारा प्रस्ताव स्वीकार किया जा सकता है
    • पक्षियों को पालने के लिए मुर्गीपालन इकाइयों को खरीदते समय मूलभूत सुविधाओं/लौजिस्टिक को सुनिश्चित किया जाना है.
    • यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बिक्री/खरीद के अधीन फर्म/मुर्गीपालन इकाई पर कोई ऋण बकाया नहीं है.
    • विक्रेता से बिक्री करार प्राप्त करना होगा.
    • मुर्गीपालन इकाइयों को वित्तपोषण के अन्य सभी दिशानिर्देशों का पालन किया जाना है.
    • प्रत्यायोजन - प्रत्यायोजन शक्तियों पर मौजूदा नीति के अनुसार.

    रिपोर्टिंग

    • सभी स्वीकृतियों की सूचना मासिक आधार पर एम-27 में नियंत्रक कार्यालय को दी जाएगी.
    • उचित एमआईएस रिपोर्टिंग के लिए शाखा स्तर पर अकाउंट लेबल "पोल्ट्री" को जोड़ा या अपडेट किया जाएगा.

    अन्य नियम और शर्तें

    • यह योजना सभी नई ऋण सीमाओं पर लागू होगी.
    • मौजूदा इकाइयां जो योजना के तहत शामिल नहीं हैं, समीक्षा/नवीकरण के समय योजना के तहत कवर की जा सकती हैं.
    • मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार शेड/बिल्डिंग, अन्य सिविल संरचनाओं, मशीनरी/उपकरण, फीड, दवाओं का व्यापक बीमा बैंक खंड के साथ प्राप्त किया जाना है.
    • पार्टी भुगतान किए गए स्टॉक की स्थिति पर पहुंचने के लिए लेनदारों की सूची के साथ मासिक आधार पर निर्धारित प्रारूप में स्टॉक विवरण ( पक्षी चार्ट, फ़ीड, दवाइयां, टीके आदि सहित) और आयु-वार बही ऋण विवरण प्रस्तुत करेगी. (बही ऋणों और लेनदारों के विवरण को चार्टेड अकाउंटेंट द्वारा त्रैमासिक आधार पर प्रमाणित किया जाना है).
    • मुर्गीपालन द्वारा इकाई संदूषण और बीमारी की समस्या से बचने के लिए सभी जैव-सुरक्षा मानदंडों जैसे स्वच्छता प्रथाओं, समय पर टीकाकरण आदि, पशु चिकित्सक की सेवाओं की उपलब्धता को सुनिश्चित करना चाहिए.
    • नाबार्ड द्वारा जारी मुर्गी पालन के सभी तकनीकी पहलुओं का पालन किया जाना है. एक सांकेतिक सूची अनुबंध -10 में दी गई है.
    • मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार अन्य सभी लागू नियम और शर्तें.
    • समीक्षा/नवीकरण - बैंक की मौजूदा नीति के अनुसार खाते की समीक्षा/नवीकरण किया जाएगा.
    • अनुमतियां/अनुमोदन : पोल्ट्री किसानों/उद्यमियों को भूमि रूपांतरण प्रमाण पत्र (जहां लागू हो), जीएसटी प्रमाण पत्र (यथा लागू), पशु चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित करना, व्यवस्थाएं प्रस्तुत करना डीओसी ( एक दिन पुराने चूजों), बिजली, पानी की सुविधा, आगे और पीछे के वार्ड लिंकेज के लिए सक्षम प्राधिकारी से निर्माण के लिए अनुमोदन की योजना, पोल्ट्री इकाई की स्थापना के लिए गांव/पंचायत की मंजूरी प्रस्तुत करना है.
    • मुर्गीपालन के लिए शाखाओं को सभी तकनीकी पहलुओं का पालन करना चाहिए.

    बैटरी चालित पिंजरों पर स्पष्टीकरण

    • फील्ड पदाधिकारियों को बैटरी संचालित पिंजरों के वित्तपोषण के संबंध में आईसी संख्या: 05116-2019 दिनांक: 07.11.2019 का पालन करना चाहिए. "जानवरों के प्रति क्रूरता की रोकथाम (अंडा देने वाली मुर्गी) नियम 2019 दिनांक 29.04.2019 पर भारत सरकार के मसौदा नियमों की एक प्रति संलग्न है.
    • ये नियम उन फार्मों पर लागू होते हैं जहां कॉलोनी बाड़ों में अंडे देने वाली मुर्गियां रखी जाती हैं.
    • मसौदा नियमों के अनुसार, प्रति पक्षी फर्श की जगह 550 वर्ग सेंटीमीटर से कम नहीं होनी चाहिए और प्रत्येक पिंजरे में अधिमानी तौर पर कम से कम 6 से 8 पक्षियों को रखना चाहिए, इस प्रकार अंडा देने वाली मुर्गियों के लिए लेटने, खड़े होने, पंख फड़फड़ाने, मुड़ने तथा दाना एवं पानी के लिए उचित स्थान सुनिश्चित करना चाहिए.
    • जहां भी राज्य सरकारों ने इस तरह का अधिनियम बनाया है, शाखाओं को सलाह दी जाती है कि वे संबंधित पशुपालन विभाग से पोल्ट्री इकाई की स्थापना के लिए पंजीकरण प्रमाण पत्र प्राप्त करें, जो 5 साल तक वैध है.
    • शाखाओं को यूनिट निरीक्षण करते समय इसे सुनिश्चित करने की सलाह दी जाती है.

    प्रतिभूति दस्तावेज

    • डीपी नोट
    • दृष्टिबंधक करार – एसडी -07
    • गारंटी विलेख - एसडी -08
    • कृषि अग्रिम के लिए घोषणा/वचनबद्धता-एडी-01
    • ब्याज दर करार - एसडी 24- एमसीएलआर
    • बंधक विलेख– एसडी-12 (एसएम के लिए) या एडी -13 (ईएम के लिए)
    • निरंतरता का पत्र - एडी 09 (एम)
    • सामान्य ग्रहणाधिकार और प्रतिसंतुलन का पत्र - एडी 02(ए)
    • सिबिल को प्रकटीकरण के लिए उधारकर्ता/गारंटर से ज्ञापन.
    • स्वीकृति सूचना में निर्धारित कोई अन्य दस्तावेज

    नीतिगत मुद्दे

    मुर्गीपालन इकाइयों के वित्तपोषण के लिए अधिकांश नीतिगत मापदंडों को अखिल भारतीय योजना में संबोधित और शामिल किया गया है. अखिल भारतीय योजना में किसी नीतिगत घटक/मुद्दे/पैरामीटर/दिशा-निर्देश/विचलन का उल्लेख नहीं होने की स्थिति में, शाखाएं बैंक की ऋण नीति का पालन करेंगी.

    सक्षम प्राधिकारी

    महाप्रबंधक/मुख्य महाप्रबंधक, कृषि कारोबार वर्टिकल फील्ड पदाधिकारियों को योजना पर स्पष्टीकरण प्रदान करने के लिए सक्षम प्राधिकारी होंगे.

    वर्गीकरण

    प्राथमिकता क्षेत्र कृषि: व्यक्तिगत किसानों को ऋण राशि और कॉर्पोरेट किसानों के लिए रु. 2 करोड़ तक के ऋणों पर ध्यान दिए बिना, व्यक्तिगत किसानों के एफपीओ, साझेदारी फर्मों और किसानों की सहकारी समितियों और व्यक्तिगत किसानों को दिए गए ऋणों को कृषि प्राथमिकता के कृषि ऋण के तहत वर्गीकृत किया जाना है. कॉर्पोरेट किसानों को 2.00 करोड़ रुपए से अधिक के ऋण को कृषि गैर-प्राथमिकता के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा. तदनुसार, एजीआरपीएस/एजीएनपीएस का मूल्यांकन नोट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाना चाहिए.

    फिनेकल कोड्स

    शाखा इस योजना के तहत खोले गए खाते को फिनेकल में "पोल्ट्री" के रूप में लेबल करेगी. खाते RA012,CCGEN/CCHAF स्कीम कोड में खोले जाने हैं. अग्रिम के उद्देश्य (पीओए) को एमआईएस टैब पर फिनैकल में 01203 के रूप में दर्ज किया जाना चाहिए.

    योजना की वैधता

    पैन इंडिया योजना 22.09.2024 तक वैध है.


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    Conditions apply

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    1. Which purposes are eligible for the loan?

    Purchase of /Birds, Equipments, Construction of Shed and Working Capital for the activity.


    2. Will there be insurance coverage for animals?

    Poultry farmers can also contribute to a separate risk fund in lieu with insurance.


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